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Fatty Liver Disease – लक्षण, कारण एवं उपचार इत्यादि

भारत में प्रत्येक वर्ष तकरीबन 2 लाख से भी अधिक लोग Fatty Liver Disease (फैटी लिवर) की बीमारी की वजह से अपनी जान गंवा देते हैं। लिवर का रोग भारत में मृत्यु होने के 10 शीर्ष कारणों में से एक है। लिवर अथवा जिगर हमारे शरीर के सबसे प्रमुख आंतरिक अंगों में से एक होता है, जो हमारे शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि होने के साथ-साथ हमारे शरीर का दूसरा सबसे बड़ा अंग भी है। ‌कई बार इसको यकृत भी कहा जाता है।

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लिवर का कार्य | Liver Functions

  • लिवर ही हमारे पेट के अंदर पित्त का निर्माण करता है, जो वसा के टूटने में भी मदद करता है। इसके साथ-साथ हमारा लिवर हमारे रक्त के डिटॉक्सिफिकेशन (साफ–सफाई) में भी हमारे शरीर की काफी मदद करता है।
  • परंतु आजकल अपने खानपान की आदतों और लापरवाही के कारण लगभग हर चौथा व्यक्ति Fatty Liver Disease की समस्या से ग्रसित है। वर्तमान समय में सबसे अधिक समस्याएं  Fatty Liver Disease (फैटी लिवर) की देखी जा रही हैं।

आखिर फैटी लिवर [Fatty Liver Disease] क्या होता है और इसका क्या-क्या उपचार है? आज के इस ब्लॉग में हम आपको यही जानकारी देने वाले हैं ।

फैटी लिवर क्या होता है ? | What is Fatty Liver Disease ?

मूलतः एक सामान्य लिवर में कुछ ना कुछ फैट अवश्य होता है। परंतु कभी-कभी लिवर की कोशिकाओं में अनावश्यक फैट की मात्रा काफी अधिक बढ़ जाती है। फैटी लिवर एक ऐसी अवस्था है जिसमें हमारे लिवर में तकरीबन 30-40 प्रतिशत तक अधिक  वसा का जमाव हो जाता है। यह एक गंभीर रोग माना जाता है, जिसे आमतौर पर Fatty Liver Disease (फैटी लिवर) के नाम से जाना जाता है।

फैटी लिवर के प्रकार | Types of Fatty Liver Disease

मूल रूप से Fatty Liver (फैटी लिवर) दो प्रकार के होते हैं :

01- एल्कोहलिक फैटी लिवर :  जो शराब के अत्याधिक सेवन से होता है। और

02- गैर अल्कोहलिक फैटी लिवर : यह उनको होता है जो अल्कोहल का सेवन तो नहीं करते। परंतु उनके खाने-पीने की आदतों की वजह से उनको फैटी लीवर हो जाता है।

उपरोक्त के अलावा मोटापा आदि भी Fatty Liver (फैटी लिवर) के कारण हो सकते हैं । इसके अलावा यह बीमारी अनुवांशिक भी हो सकती है।

फैटी लिवर के लक्षण | Symptoms of Fatty Liver Disease

खासतौर पर Fatty Liver (फैटी लिवर) की शुरुआत के समय ही इसके लक्षण देखने को नहीं मिलते परंतु जैसे-जैसे यह अधिक बढ़ जाता है तब धीरे-धीरे उसके लक्षण भी सामने आने लगते हैं। इसमें कुछ लोगों को थकान महसूस होने लगती है।

इसके अलावा कभी-कभी मतली, पेट में दर्द और शरीर के वजन में भी काफी कमी आ जाती है। व्यक्ति की भूख में काफी कमी हो जाती है और भ्रम जैसे लक्षणों का सामना भी करना पड़ता है। कई बार पेट में लगातार दर्द होना रोजाना की समस्या बन जाती है ।

आमतौर पर यह सभी समस्याएं इतनी गंभीर नहीं दिखाई पड़ती परंतु इसका समय पर पता ना लगना और ईलाज ना होने से लिवर को काफी अधिक नुकसान पहुंच सकता है, जिसे सिरोसिस भी कहा जाता है। इसकी वजह से पीलिया जैसी अन्य बीमारियां भी हो सकती हैं। लिवर की अत्यधिक सूजन और क्षति लिवर के दैनिक कार्य को पूर्ण रूप से प्रभावित कर सकती है।

इसकी वजह से कई बार लिवर ट्रांसप्लांट करवाने तक की नौबत आ सकती है। एवं और अधिक लेवल पार करने  पर लिवर का कैंसर भी हो सकता है। इसलिए कई बार डॉक्टर फैटी लिवर की बीमारी  होने पर हेपेटाइटिस का टेस्ट करवाने की भी सलाह देते हैं।

 

फैटी लिवर का कारण | Causes of Fatty Liver Disease

Fatty Liver Disease (फैटी लिवर) के बहुत से कारण हो सकते हैं जैसे :

01- अल्कोहल का अधिक से अधिक सेवन करना :- लिवर पर फैट का डिपोजिशन शराब के कारण होता है। शराब का ज्यादा सेवन करने से लिवर में सूजन आ सकती है और लिवर क्षतिग्रस्त हो सकता है।

02- मोटापा :- मोटापा भी Fatty Liver (फैटी लिवर) विकसित होने का खतरा पैदा करता है। डायबिटीज से पीड़ित लोगों और उच्च कोलेस्ट्रॉल वालों को Fatty Liver (फैटी लिवर) होने का खतरा काफी अधिक होता है। इसलिए हमें अपने शरीर के मोटापे एवं कोलेस्ट्रोल को कंट्रोल में रखना चाहिए।

03- दवाइयों का सेवन :- कई बार दवाइयों के अत्यधिक सेवन की वजह से भी Fatty Liver (फैटी लिवर) की समस्या आ सकती है। कई बार गर्भवती महिलाओं में भी Fatty Liver (फैटी लिवर) की बीमारियां देखी जाती है। यह हार्मोनल परिवर्तनों के कारण भी हो सकती है। एस्पिरिन जैसी कुछ दवाईयों को भी इसका कारण माना गया है।

04- अनुचित आहार :- Fatty Liver (फैटी लिवर) के लिए आमतौर पर हमारे द्वारा अनुचित आहार को भी एक कारण माना जाता है। उचित भोजन ना लेने तथा कुपोषित आदि हो जाने पर इसका जोखिम काफी अधिक बढ़ जाता है, जिसकी वजह से अचानक से वजन का कम होना भी इसका एक कारण हो सकता है। बहुत अधिक भारी और तेलयुक्त तथा कच्चे खाद्य पदार्थों का सेवन करने से एवं अत्यधिक नींद लेने से भी Fatty Liver (फैटी लिवर) की समस्याएं पैदा हो जाती हैं।

05- अनुवांशिकी :- जिसके माता-पिता स्वयं पहले से Fatty Liver (फैटी लिवर) की बीमारी से पीड़ित हुए होते हैं उनमें इस रोग के विकसित होने का खतरा काफी अधिक बढ़ जाता है। हम कह सकते हैं कि फैटी लिवर में अनुवांशिकी भी एक प्रमुख भूमिका निभाता है।

फैटी लिवर से बचाव | Prevention From Fatty Liver Disease

मूल रूप से फैटी लिवर रोग में हमारे लिवर की चर्बी पांच से दस परसेंट अधिक तक बढ़ जाती है जो कि हमारे शरीर के लिए बेहद हानिकारक होती है। इसकी वजह से थकान, पेट में जलन जैसी समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं। जो लोग शराब का सेवन नहीं करते उनमें Fatty Liver Disease (फैटी लिवर) के कारण का पता डॉक्टर अभी तक ठीक से नहीं लगा पाए हैं।

इसलिए Fatty Liver (फैटी लिवर) की बीमारी से बचने के लिए हमें शराब के अत्याधिक सेवन से बचना चाहिए तथा अधिक से अधिक तेल युक्त एवं कच्चे पदार्थों आदि से बने हुए खाद्य पदार्थों का सेवन करने से भी बचना चाहिए। हमें अपने शरीर के मोटापे और कोलस्ट्रोल को कंट्रोल में रखना चाहिए और योग आदि के माध्यम से रोजाना व्यायाम भी किया जाना चाहिए।

फैटी लिवर का पता कैसे चलता है ? | How Does Fatty Liver Be Detected ?

ऊपर बताए गए लक्षणों के देखने पर आप स्वयं ही यह पता लगा सकते हैं कि आपको Fatty Liver (फैटी लिवर) की समस्या हो गई है। हालांकि ऊपर गए बताए गए लक्षणों में से कुछ लक्षण अन्य बीमारियों के भी हो सकते हैं। इसलिए हम अपने खून का टेस्ट करवा कर इसका पुख्ता परीक्षण कर सकते हैं।

आमतौर पर एलएफटी टेस्ट (लिवर फंक्शन टेस्ट-Liver Function Test) के माध्यम से इस बीमारी का पता लगाया जाता है। कई बार इसके लिए इस टेस्ट के साथ-साथ अल्ट्रासाउंड वगैरह भी करवाया जाता है, जिससे लिवर का  मोटापा सफेद क्षेत्र के रूप में दिखाई देता है। कई बार सिटी स्कैन या एमआरआई स्कैन जैसे अन्य इमेजिंग टेस्ट भी करवाए जा सकते हैं। इसके अलावा फाइब्रोस्कैन (Fibro Scan) की मदद से भी लिवर के सामान्य टिशूज की जांच कारवाई जा सकती है। इस इमेजिंग टेस्ट से लिवर में फैट का पता लगाया जा सकता है।

कई बार डॉक्टर लिवर बायोप्सी (Liver Biopsy) की भी मदद लेते हैं जिसके अंतर्गत लिवर के परीक्षण के लिए डॉक्टर सुई की मदद से लिवर का एक टुकड़ा निकाल लेते हैं। और उसकी जांच से इसका परीक्षण किया जाता है।

फैटी लिवर का उपचार | Treatment of Fatty Liver Disease

Fatty Liver (फैटी लिवर) के रोगियों को मूल रूप से अपनी जीवनशैली में बदलाव किया जाना चाहिए। अपने खाने-पीने की आदतों को बदलना चाहिए। Fatty Liver (फैटी लिवर) को कम करने के लिए उन्हें शरीर का बहुत ज्यादा वजन घटाने की जरूरत नहीं पड़ती बल्कि सिर्फ 10% तक वजन कम करना ही काफी होता है। फुर्तीला व्यायाम करने से भी लिवर में फैट की कमी होती है।

इसके अलावा दवाइयों एवं अन्य उपचारों के माध्यम से Fatty Liver Disease (फैटी लिवर) का ईलाज किया जाता है ।

बेरिएट्रिक सर्जरी (Bariatric Surgery):  गैस्ट्रोइंटेस्टिनल (Gastrointestinal) की एक सर्जरी होती है, जिसके कारण वजन कम होने लगता है। बेरिएट्रिक सर्जरी को नॉनएल्कोहलिक रोगी के लिए एक संभावित उपचार माना गया है।

लिवर प्रत्यारोपण : जब लिवर सिरोसिस रोग से ग्रसित हो जाता है और काफी अधिक जटिलताएं बढ़ जाती हैं तो ऐसे में उपचार के लिए एक या दो ही विकल्प बचते हैं। या तो रोगी को जटिलताओं का ईलाज किया जाए या फिर  रोग ग्रसित लिवर को प्रत्यारोपित ही कर दिया जाए।

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फैटी लिवर की वजह से होने वाली अन्य बीमारियां | Other Diseases Caused by Fatty Liver Disease

जैसा कि हमने पहले ही बताया है कि कई बार यह समस्या अपने उच्च स्तर पर पहुंच जाए तो फिर उससे और भी अधिक समस्याएं आ सकती हैं। नॉन एल्कोहलिक फैटी लिवर या नॉनएल्कोहलिक स्टीटोहेपिटाइटिस (Steatohepatitis ) दोनों के लिए सिरोसिस (Cirrhosis) मुख्य जटिलताओं में से एक माना गया है। सिरोसिस लिवर में किसी भी प्रकार की क्षति पहुंचने से होता है।

जैसे ही हमारा लिवर बढ़ती सूजन को रोकने की कोशिश करता है तो इससे  फाइब्रोसिस (Fibrosis) फैलने लगता है। जिसकी वजह से कई बार पेट में द्रव बनना, इसोफेगस (Esophagus) की नसों में सूजन का हो जाना (जिसकी वजह से वह फट भी सकती हैं अथवा खून भी निकल सकता है), बोलते हुए अटकना और लिवर कैंसर अथवा लिवर का फेल हो जाना जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। ‌

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